टाइल घर के फर्श, दीवार और बाहरी सतहों को सजाने का एक प्रमुख विकल्प है। भारत में विभिन्न जलवायु और उपयोग के पैटर्न के कारण टाइल की क्वालिटी, वाटर एब्जॉर्प्शन और स्लिप रेजिस्टेंस पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। सही टाइल चुनने से न केवल सौंदर्य में सुधार होता है बल्कि दीर्घकालिक रखरखाव लागत भी घटती है। इस गाइड में हम टाइल के प्रमुख प्रकार, उनके गुण, और विभिन्न कमरों के लिये उपयुक्त चयन पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
सिरेमिक टाइल सबसे सामान्य रूप से उपयोग की जाने वाली फर्श टाइल है जो क्ले को हाई टेम्परेचर पर बेक करके बनती है। इसका वाटर एब्जॉर्प्शन 10% से 15% तक हो सकता है, जिससे यह हल्की नमी वाले क्षेत्रों में ठीक रहता है, परन्तु अत्यधिक जल-प्रभाव वाले स्थानों में कम टिकाऊ हो सकता है। विट्रिफाइड टाइल सिरेमिक की तुलना में अधिक प्रेशर और तापमान पर बेक की जाती है, जिससे इसकी वाटर एब्जॉर्प्शन 0.5% से 3% तक घट जाती है और यह अधिक दाब सहन करती है। पोर्सलेन टाइल क्ले, सिलिका और एल्यूमिना के मिश्रण से बनती है, जिसमें वाटर एब्जॉर्प्शन 0.5% से कम रहता है, इसलिए यह बहुत ही हाई ट्रैफ़िक और बाहरी उपयोग के लिये आदर्श है। ग्लेज़्ड टाइल सतह पर चमकदार कोटिंग होती है जो रंग और पैटर्न को स्थायी बनाती है, परन्तु कोटिंग के बाद टाइल की स्लिप रेजिस्टेंस को सही ढंग से जांचना आवश्यक है।
स्लिप रेजिस्टेंस के हिसाब से विट्रिफाइड और पोर्सलेन टाइल में R-ड्रैग मान 0.6 से 0.8 तक होता है, जबकि सिरेमिक टाइल में 0.6 से कम हो सकता है। एंटी-स्किड टाइल विशेष रूप से बाथरूम और किचन में उपयोग की जाती है जहाँ फर्श को गीला रहने की संभावना अधिक रहती है। इन सभी प्रकारों के बीच चयन करते समय इम्पैक्ट रेजिस्टेंस, थर्मल एक्सपैंशन, और एस्थेटिक फिनिश को ध्यान में रखना चाहिए।
एंटी-स्किड टाइल को अक्सर "नॉन-स्किड" या "एंटी-स्लिप" कहा जाता है, और यह सतह पर विशेष टेक्सचर या एंटी-कोरोजन कोटिंग की मदद से फिसलन को कम करती है। इस प्रकार की टाइल का वाटर एब्जॉर्प्शन सामान्यतः 0.5% से 4% तक रहता है, जिससे यह गीले क्षेत्रों में सुरक्षित रहती है। बाथरूम, किचन, और बालकनी जैसी जगहों में एंटी-स्किड टाइल को प्राथमिकता देना चाहिए। वॉल टाइल मुख्यतः दीवार की सजावट और नमी प्रतिरोध के लिये उपयोग की जाती है; इनकी मोटाई 6mm से 10mm तक होती है और वाटर एब्जॉर्प्शन 0.5% से 5% तक हो सकता है।
वॉल टाइल को चुनते समय ग्लेज़्ड फिनिश या मैट फिनिश का चयन किया जा सकता है। ग्लेज़्ड वॉल टाइल में चमकदार सतह होती है जो प्रकाश को रिफ्लेक्ट करती है, जिससे छोटे बाथरूम में स्थान बड़ा दिखता है। मैट फिनिश टाइल नमी के धब्बों को छुपाने में मदद करती है और अधिक आधुनिक लुक देती है। एंटी-स्किड फर्श टाइल और वॉल टाइल दोनों में एस्टेटिक कॉम्बिनेशन को ध्यान में रखते हुए रंग, पैटर्न और आकार का चयन करना चाहिए।
भारत में कई भरोसेमंद टाइल निर्माता हैं जो विभिन्न वर्गों के लिए उत्पाद प्रदान करते हैं। नीचे एक संक्षिप्त तालिका में प्रमुख ब्रांडों के सामान्य क्वालिटी पैरामीटर दिखाए गए हैं। यह तालिका मात्र सामान्य दिशा-निर्देश है और प्रत्येक ब्रांड के विभिन्न प्रोडक्ट लाइन्स में अंतर हो सकता है।
| ब्रांड | मुख्य टाइल प्रकार | वॉटर एब्जॉर्प्शन | ड्यूरेशन (वर्ष) | कीमत (Rs. प्रति वर्ग फुट) |
|---|---|---|---|---|
| Somany | विट्रिफाइड, पोर्सलेन | 0.5% - 3% | 15-20 | 80-180 |
| Asiana | सिरेमिक, एंटी-स्किड | 5% - 12% | 10-15 | 30-90 |
| Kajaria | विट्रिफाइड, ग्लेज़्ड | 0.5% - 2% | 12-18 | 70-150 |
| Nitco | पोरसेलेन, एंटी-स्किड | 0.2% - 1% | 20-25 | 120-250 |
| Johnson | सिरेमिक, एंटी-स्किड | 6% - 14% | 8-12 | 25-70 |
| Sahara | विट्रिफाइड, ग्लेज़्ड | 0.5% - 3% | 13-20 | 90-180 |
| Keralit | पोरसेलेन, एंटी-स्किड | 0.2% - 0.8% | 18-30 | 150-300 |
इन ब्रांडों में से प्रत्येक की प्रोडक्ट लाइन्स अलग-अलग मूल्य रेंज और क्वालिटी मानकों के साथ आती हैं। खरीदते समय केवल कीमत पर नहीं, बल्कि वाटर एब्जॉर्प्शन, स्लिप रेजिस्टेंस और वारंटी पर भी ध्यान देना चाहिए।
घर के विभिन्न क्षेत्रों में जल, ट्रैफ़िक और सौंदर्य की अलग-अलग मांगें होती हैं। नीचे प्रत्येक प्रमुख कमरे के लिये अनुशंसित टाइल प्रकार और उनकी विशेषताएँ दी गई हैं।
इन अनुशंसाओं को अपनाते समय टाइल के आकार, ग्राउट लाइन की चौड़ाई और फिनिश को भी ध्यान में रखें। बड़े आकार की टाइल से कम ग्राउट लाइन्स और साफ़ लुक मिलता है, परन्तु इंस्टॉलेशन में सतह की लेवलिंग अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
टाइल खरीदते समय कुछ सरल लेकिन प्रभावी परीक्षण किए जा सकते हैं जिससे आप टाइल की वास्तविक क्वालिटी का पता लगा सकते हैं। नीचे प्रमुख परीक्षणों का विवरण दिया गया है।
इन सभी परीक्षणों को एक साथ करने से आप टाइल की प्रोसेसिंग क्वालिटी, डेंसिटी और उपयोगी जीवनकाल का सही अनुमान लगा सकते हैं। हमेशा प्रमाणित सप्लायर से टाइल खरीदें और उत्पाद के साथ मिलने वाले क्वालिटी सर्टिफिकेट को देखें।
टाइल की लाइफ़टाइम को बढ़ाने के लिये सही इंस्टॉलेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। नीचे कुछ आवश्यक टिप्स दिए गए हैं जिन्हें फॉलो करने से टाइल की स्थायित्व में सुधार होगा।
इंस्टॉलेशन के बाद टाइल को कम से कम 48 घंटे तक ट्रैफ़िक से दूर रखें, ताकि अडहेसिव पूरी तरह क्योर हो सके। इसके अतिरिक्त, टाइल के चारों ओर वेंटिलेशन सुनिश्चित करना चाहिए ताकि नमी की समस्या न उत्पन्न हो। अधिक जानकारी के लिये टाइल इंस्टॉलेशन गाइड देख सकते हैं।
टाइल की लाइफ़टाइम को बढ़ाने के लिये नियमित रखरखाव आवश्यक है। नीचे कुछ प्रभावी रखरखाव उपाय दिए गए हैं जो टाइल को नई जैसी चमक बनाए रखेंगे।
टाइल की सतह पर अगर कभी कोई स्क्रैच या चिपकलापन दिखे तो तुरंत प्रोफेशनल को बुलाकर रिपेयर करवाएँ। इससे बड़े नुकसान से बचाव होगा। टाइल की देखभाल में निरंतरता सबसे बड़ी कुंजी है, और यह आपके घर को हमेशा नया जैसा रखेगा।
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टाइल की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है - टाइल का प्रकार, आकार, फिनिश और ब्रांड। सामान्य तौर पर भारत में टाइल की कीमत इस प्रकार है:
बजट बनाते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि टाइल की वारंटी, वाटर एब्जॉर्प्शन और स्लिप रेजिस्टेंस को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। अक्सर थोड़ा महँगी लेकिन उच्च क्वालिटी वाली टाइल दीर्घकाल में कम रखरखाव खर्च और बेहतर सौंदर्य देती है।
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